लड़कियां प्रेम में ख़ुद को घिसती रहीं
लड़के किसी और की तलाश में भागते रहे
लड़कियां दूर किसी शहर में नौकरी करती रहीं
समाज हर दिन उन्हें कोसता रहा
लड़कियां जीवन भर संभालती रहीं अपने भाई को
समाज उससे बहन की रक्षा करवाता रहा
लड़कियों ने लगाया सारा ध्यान परिवार जोड़े रखने में
उसी परिवार ने उन्हें दूसरे घर भेज दिया
लड़कियों ने झेला….
लिंगभेद
रंगभेद
जातिगत भेद
सामाजिक स्वतंत्रता में भेद
पर लड़कियों ने नहीं किया फ़र्क़… उन लोगों में
जिन्होंने उसे पशु से भी बदतर होना एहसास कराया
लड़कियां दया का सागर है
समाज उस सागर में मौजूद एक चट्टान
चट्टान जो सागर को रोकने का प्रयास करती है
लड़कियां अपनी लहरों से उस चट्टान की सतह हिला देतीं हैं
दुनिया की सबसे खूबसूरत आँखें ईश्वर ने तुम्हें दी है
तुम्हारे लिए ही उसने गुलाब का फूल बनाया
लेकिन वो तुम्हारी आँखों से कम खूबसूरत निकला
तुम्हारे लिए ही उसने झरने बनाये
वो भी तुम्हारे सपनों के आगे ठहर गये
इसलिये धरती तुमसे जलती है
तुमसे जलन उसके ग्लेशियर पिघला देती है
और मूर्ख इसे ग्लोबल वार्मिंग कहते है
धरती बादलों से बोल कर बारिश करवा देती है
ताकि तुम्हें बाहर निकलने से रोक दे
तुम जब बारिश में भीगते हुए बाहर निकलती हो
तो धरती के सारे फूल तुम्हारी हँसी से खिल उठते है
सूरजमुखी, सूरज की बजाए सिर्फ तुम्हें देखता है
यह देख कर सूरज को भी तुमसे जलन होती है
सूरज अपनी रोशनी से तुम्हें काबू करना चाहता है
लेकिन उसकी रोशनी तुम्हारे गीले बालों से टकरा कर इंद्रधनुष बना देती है
तुम्हारे बालों से इंद्रधनुष को रंग मिलते है
तुम्हारी खुशबू से ही गीली मिट्टी महकती है
तुम्हारे आगे धरती लाचार है
इसीलिए धरती सरकारों से जा मिलती है
सरकारें तुमसे डरती हैं
सरकारें संसद में बिल पास करातीं हैं
सरकारें तुम्हारी हँसी पर टैक्स लगाती हैं
पर सरकारें यह भूल जाती हैं की तुम आसमानों में उड़ती हो
तुम इतनी नादान हो की दुनिया की इस साज़िश को भी नहीं समझती
और इन सब से बेपरवाह, रोज़ मेरी बाँहों में चली आती हो
उसे अब मेरी खामोशी पसंद नहीं
उसे लगता है , मेरी खामोशी सन्नाटे को चीरती है
लेकिन चीरती है मेरे ज़ख़्म को उसकी बातें
वो बातें जो कभी मासूम हुआ करती थी
मेरा सब कुछ ख़त्म कर जाने के बाद एक दिन उसने पूछा -
क्या हम फिर से साथ हो सकते है…
मैं कमबख्त उसे यह भी नहीं कह सका–
मुझे उसका प्यार चाहिए था , हमदर्दी नहीं